चलिए आज आपको ले चलती हूं उसी जहाज़ पर वापस जहां से मुझे लौटे एक महीना से कुछ ज्यादा वक्त हो गया है लेकिन मेरा मन अभी तक वहीं पड़ा है! वहीं बोले तो छठे डैक के स्टेटरूम नंबर 246 में! वैसे अगर वो वहां अटक गया है तो इसमें उसका क्या दोष? वो स्टेटरूम था ही इतना कमाल का। एकदम सुखद अहसास से भरपूर, पर्सनल स्पेस।

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आप भी अगर क्रूज़ की तैयारी कर रहे हैं, अकेले हैं, कपल हैं या फिर एक छोटा बच्चा साथ है तो ज्यादा सोच—विचार करने की जरूरत ही नहीं है। स्टेटरूम चुनें, सी फेसिंग ताकि जब—तब समंदर की लहरों से गुफ्तगू करने का मौका चुरा सकें।

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ऐसे होते हैं स्टेटरूम बाहर से, मानो किसी अपार्टमेंट में टंगे इंडीपेंडेंट फ्लैट्स हों।

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बेशक, आपको अपने इस स्टेटरूम में लौटने का मौका भी चुराना होगा। क्रूज़ पर दिन भर, देर रात तक इतनी एक्टिविटीज़ चलती रहती हैं कि एक बार अपने स्टेटरूम से निकले तो फिर लौटने का वक्त़ जल्दी नहीं आता।

Mariners of The Seas में जिस रोज़ मैंने पहली बार अपने इस एलॉटेड स्टेटरूम में कदम रखा था तो अटैंडेंट साथ था। वो मेरे इस निजी कमरे की खूबियां बता रहा था, उसमें मौजूद सुविधाएं गिना रहा था। मेरे वाले डैक पर ऐसे कई अटैंडेंट थे जो तसल्ली से दूसरे मेहमानों को अटैंड कर रहे थे।

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मुझे कमरे के उस पार, खिड़की के उस तरफ से झांक रहे नीले समंदर से मिलने की बेताबी थी। मुझे मालूम था अगले चार रोज़ मेरे इस पानी पर तिरते, चलते—फिरते घर का निजी आंगन यही समंदर होने वाला है।

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उसी पर सूरज उगेगा, अस्त होगा और रात को चांद—तारों की बारात भी इसी समंदर के उपर से गुजरेगी। फिर भी बेचैनियों की इंतिहा देखिए कि अटैंडेंट के निकलते ही मैं बालकनी में दाखिल हो चुकी थी। सिंगापुर की गगनचुंबी इमारतें अब दूर हो रही थीं और क्षितिज पर उनकी एक फीकी—सी झलक बाकी थी।

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दूसरी शाम, मलक्का की खाड़ी में जैसे तूफान बरपा होने वाला था। आसमान पर टंगे बादल लहरों को चूम रहे थे और समुद्री हवाओं के थपेड़े बालकनी से मुझे उड़ाकर ले जाने की तैयारी में थे। मैं अपने कमरे में लौट आयी थी। बालकनी का शटर बंद करने की देर भर दी, मैं फिर महफूज़ थी अपनी इस छोटी—सी, सुकून भरी दुनिया मे|

और अगला भला—भला सा सवेरा कुछ यों आया था। स्टेटरूम की बालकनी से उस रोज़ के सूरज को अंगड़ाई तोड़ते देखा था कुछ इस तरह। जहाज़ ने मलेशिया के क्लांग पोर्ट पर लंगर डाला था और यात्री दिनभर घुमक्कड़ी के लिए जहाज़ से उतर चुके थे। वो दिन excursion के लिए तय था।

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जब बाकी मेहमान मलेशिया घूम रहे थे, हमने अपने जहाज़ का चप्पा—चप्पा छान डाला था। और सबसे ऊपरी डैक पर से इस नज़ारे को अपनी यादों और कैमरों में कैद कर लाए थे।

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जहाज़ का टूर लेने के बाद हम बेहद थक चुके थे। ग्यारहवें डैक पर ‘विंडजैमर्स’ में लंच किया और एक बार फिर अपने कमरे में लौट गए। दिन को शाम और शाम को रात में ढलते देखा था उस रोज़ इसी कमरे से।

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हर शाम चाय—कॉफी की चुस्कियों के संग, इसी बालकनी से परिवार और दोस्तों से वीडियो कॉल पर जुड़ जाना आदत बन गयी थी। इतना फर्राटा वाइ—फाइ पूरे जहाज़ पर था कि कभी भी, कहीं से भी, किसी से भी संपर्क में रहना बेहद आसान था।
4 दिन 4 रातें समंदर के सीने पर स्टेटरूम में बिताने के बाद बस एक ही बात कह सकती हूं पूरे भरोसे के साथ, और वो है –
If you crave for unusual journeys, far removed from the beaten path, book yourself a stateroom on a cruise with Royal Caribbean and don’t look back!

For more information, visit Tirun website and Singapore itineraries.

Author

ALKA KAUSHIK

Alka Kaushik is a Delhi based travel journalist/travel blogger who writes extensively for the Hindi National Media. Her travel inspiration is all about finding fun, offbeat and quirky travel destinations in India and abroad. She write about subjects ranging from recreational travel to tough treks.

Website: https://indiainternationaltravels.wordpress.com/